"प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण मिशन"

प्रकृति ही सभी धर्मों एवं प्राणियों का मूल आधार है।

प्रकृति ही ईश्वर, अल्लाह, गौड़ और वाहे गुरु है।

प्रकृति से ही जीवन है प्रकृति के पाँच तत्व है जिन्हे हम अपने तरीके यदि भगवान कहे तो काई अतिश्योक्ति नहीं होगी भ+ग+व+अ+न भगवान होता है। भ से भूमि ग से गगन (आकाश) व से वायु आ से अग्नि न से नीर (जल) तत्व पाँच होते है इन्ही से यह धरती पेड-पौधे, पशु पक्षी, मनुष्य आदि जीव-जन्तुओ का जीवन है उक्त तत्वो की सभी धर्मो को मानने वाले लोगो का समान रूप से आवश्यकता होती है। चाहे वह हिन्दु मुस्लिम सिख, ईसाई, क्यों न हो अब मानव जीवन में उक्त तत्वों के महत्व को संक्षिप्त रूप से दर्शाना चाहेगें। भूमि हमें रहने का स्थान तो देती है साथ हमें कृषि, कारखाने व उद्योग स्थापित करने के साथ हमें प्रकृतिक संसाधन प्रदान करती है दूसरे गगन (आकाश) से अंतरिक्ष से हमारी सुरक्षा भी होती है हमारे जीवन में आकाश ही है जो हमें एक दूसरे से सवाद (बातचीत) का एक मात्र माध्यम है। चाहे वह टेलीफोन, रेडियो, टीवी अथवा एक दूसरे से आमने सामने बैठकर एक दूसरे की आवाज सुनने मे भी आकाश एक मात्र साधन है तीसरे वायु के बिना जीवन का कोई भी अस्तित्व नही होगा जो पेड़ पौधो मनुष्य की श्वांस, पशु पक्षी तक जीवित नहीं रह पायेगें फसलो का परागण भी नही होगा। इसलिये ये वायु को ही आयु भी कहा गया है चौथे अग्नि तत्व के बिना मनुष्य का जीवन सम्भव नही, हमारे शरीर में अग्नि उर्जा के रूप में विद्यमान है। शरीर को शक्ति और बल मिलता है शरीर में गरमाहट की वजह अग्नि है। ठण्डा होने पर प्राणी मृत प्राय है पाँचवे तत्व की बात करे तो वह नीर (जल) है और जल ही जीवन है, जल है तो कल है पृथ्वी पर बहुमुल्य संसाधन है संजीवों के जीने का आधार ही जल है यदि प्रकृति के पंच तत्वो को हम प्रदुषित करें या प्रदुषित होते देखे अथवा इनमें किसी तत्व की कमी या असंतुलन होगा तो मानव (इंसान) का जीवन निश्चित रूप से खतरे में होगा। कोई धर्म खतरे में नहीं बल्की प्रकृित का खतरा ही मानव जीवन के लिये खतरा साबित होगा। अब प्रर्यावरण के प्रति मनुष्य का दायित्व निर्वाह करने का समय आ गया है जल, जंगल, जमीन के लिये अधिक से अधिक पेड लगायें तभी जीवन सुरक्षित रहेगा है

बाबा हरिदास जी महाराज

पीठाधीश्वर / संस्थापक

श्री प्रीतम धाम दशमेश घाट चेरिटेबल ट्रस्ट (रजि) प्रकृति के रक्षार्थ सभी धर्मो के धर्मयोद्धा सम्पर्क करें।

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प्रकृति बचेगी तो जीवन बचेगा

सबसे बड़ा धर्म प्रकृति को बचाना है और उसके प्रति प्रेम जागृत करना है।

डॉ० आर० पी० सिंह